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गाइड्स

क्रिकेट गेंद कितने ओवर तक चलती है? मजबूती की पूरी गाइड

क्रिकेट गेंद कितने समय तक सही रहती है, यह उसकी बनावट, लेदर, सीम, पिच, मौसम, देखभाल और इस्तेमाल पर निर्भर करता है।

1 December 2025Updated 1 August 202611 min readBy Prashant
Red leather cricket ball placed between turf and a dry abrasive cricket surface.

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क्रिकेट गेंद कितने ओवर तक चलती है?

लेदर क्रिकेट गेंद थोड़े समय के अभ्यास से लेकर 80 ओवर या उससे ज्यादा समय तक चल सकती है। यह उसकी बनावट, पिच, मौसम, देखभाल और खेल के स्तर पर निर्भर करता है। हर गेंद के लिए एक तय संख्या नहीं बताई जा सकती।

Key facts

  • मैच में नई गेंद लेने का नियम यह तय नहीं करता कि पुरानी गेंद कितने समय तक खेलने लायक रहेगी।
  • पिच की हालत गेंद की मजबूती पर बड़ा असर डालती है।
  • लाल गेंद सबसे अधिक टिकाऊ होती है
  • सही तरीके से सुखाने और रखने से गेंद को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

गेंद कितने ओवर तक चलेगी, इसका केवल अंदाजा लगाया जा सकता है। गेंद की गुणवत्ता, दो-पीस या चार-पीस बनावट, लेदर, सीम, आउटफील्ड, पिच, नमी, गेंदबाजी की रफ्तार और इस्तेमाल की संख्या से उसकी उम्र बदल सकती है।

In this article11 sections

क्रिकेट में अक्सर पूछा जाता है, “एक गेंद कितने समय तक चलती है?” यह सवाल जितना आसान लगता है, इसका जवाब उतना आसान नहीं है।

मेरठ में क्रिकेट गेंद बनाने के हमारे अनुभव के अनुसार केवल ओवरों की संख्या देखना काफी नहीं है। लेदर की गुणवत्ता, अंदरूनी बनावट, सिलाई, आकार, बाहरी परत, पिच और देखभाल—सभी बातें गेंद के घिसने पर असर डालती हैं।

एक अच्छी गेंद मुलायम घास वाली आउटफील्ड पर लंबे समय तक चल सकती है, लेकिन सूखी और खुरदरी जगह पर वही गेंद जल्दी घिस सकती है।

इसीलिए हर मैदान और हर परिस्थिति के लिए गेंद की एक तय उम्र नहीं बताई जा सकती।

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क्रिकेट गेंद की उम्र में इतना अंतर क्यों होता है?

गेंद की उम्र उसके लेदर, अंदरूनी हिस्से, सिलाई, आकार, बाहरी परत, पिच, मौसम, गेंदबाजी की रफ्तार और देखभाल पर निर्भर करती है।

Key facts

  • खुरदरी जगह पर लेदर जल्दी खराब हो सकता है।
  • नमी से लेदर नरम हो सकता है और गेंद का आकार बदल सकता है।
  • सीम और अंदरूनी हिस्से की गुणवत्ता गेंद के प्रदर्शन पर असर डालती है।
  • एक जैसी दो गेंदें अलग परिस्थितियों में अलग तरह से घिस सकती हैं।

चमक या स्विंग कम होने के बाद भी गेंद खेलने लायक रह सकती है। गेंद की उम्र का मतलब यह भी हो सकता है कि वह कितने समय तक सुरक्षित रहती है, अपना आकार बनाए रखती है, उसकी सीम काम करती है या वह मैच जैसा प्रदर्शन देती है।

लेदर और बाहरी परत गेंद की मजबूती पर कैसे असर डालते हैं?

लेदर की मजबूती केवल उसे तैयार करने के तरीके के नाम पर निर्भर नहीं करती। खाल की गुणवत्ता और मोटाई, उसे तैयार करने का तरीका, रंग, पॉलिश और बाहरी परत—सभी बातें गेंद पर असर डालती हैं।

गेंदों की तुलना करते समय देखें:

  • लेदर का प्रकार और मोटाई
  • बाहरी सतह की फिनिश
  • कट और खरोंच सहने की क्षमता
  • लेदर कितनी अच्छी तरह अपना आकार बनाए रखता है
  • गेंद अभ्यास के लिए बनी है या मैच के लिए

कई क्रिकेट गेंदों में एलम से तैयार लेदर इस्तेमाल होता है, लेकिन केवल “एलम-टैन्ड” लिखा होना अच्छी गुणवत्ता की गारंटी नहीं है। गेंद की पूरी बनावट और फिनिश देखना जरूरी है।

गेंद का अंदरूनी हिस्सा: कॉर्क, धागा और दूसरी सामग्री

गेंद का अंदरूनी हिस्सा उसके कड़ेपन, वजन, संतुलन, उछाल और आकार पर असर डालता है।

आम लेदर क्रिकेट गेंद में कॉर्क से बना अंदरूनी हिस्सा होता है, जिसके चारों ओर धागा या ऊन कसकर लपेटा जाता है। अलग-अलग गेंदों और कंपनियों में यह बनावट बदल सकती है। कुछ कम कीमत वाली अभ्यास गेंदों में दूसरी सामग्री भी इस्तेमाल हो सकती है।

गेंद की तुलना करते समय देखें:

  • वजन का सही संतुलन
  • हर तरफ से एक जैसा आकार
  • जरूरत के अनुसार कड़ापन
  • काबू में रहने वाला उछाल
  • खेल के स्तर के अनुसार बनावट

हाथ से सिली और मशीन से सिली क्रिकेट गेंदें

सिलाई का तरीका सीम पर असर डाल सकता है, लेकिन हाथ से सिली हर गेंद अपने आप अच्छी नहीं होती और मशीन से सिली हर गेंद खराब नहीं होती।

लेदर की गुणवत्ता, धागा, सिलाई का खिंचाव, सीम की ऊंचाई, गेंद का आकार और फिनिश—सभी बातें जरूरी हैं।

अच्छी तरह हाथ से सिली गेंद में ये खूबियां हो सकती हैं:

  • मजबूत और उभरी हुई सीम
  • गेंदबाजों के लिए अच्छी पकड़
  • गेंद की बनावट को बेहतर सहारा
  • सिलाई के खिंचाव पर कारीगर का नियंत्रण

मशीनों की मदद से:

  • गेंद को एक जैसा आकार दिया जा सकता है
  • बनावट को बार-बार एक जैसा रखा जा सकता है
  • काम जल्दी किया जा सकता है
  • माप को काबू में रखा जा सकता है

सही गेंद का चुनाव उसकी पूरी बनावट और इस्तेमाल के आधार पर करना चाहिए।

गेंद का प्रकार उसके इस्तेमाल पर कैसे असर डालता है?
गेंद का प्रकारआम इस्तेमाल
चार-पीस लाल गेंदलंबे प्रारूप के मैचों में लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए
सफेद गेंदसीमित ओवर क्रिकेट के लिए; खेल के दौरान चमक कम हो सकती है
गुलाबी गेंददिन-रात के लंबे मैचों के लिए
दो-पीस लेदर गेंदस्कूल, कोचिंग और नियमित अभ्यास के लिए

मैच का प्रारूप गेंद के इस्तेमाल पर कैसे असर डालता है?

लाल, सफेद और गुलाबी गेंदों को अलग-अलग तरह के मैचों के लिए बनाया जाता है। मैच के नियम और गेंद की बनावट तय करते हैं कि एक गेंद कितने ओवर इस्तेमाल होगी।

लाल गेंद

लाल गेंद लंबे प्रारूप के क्रिकेट के लिए बनाई जाती है। कई दिनों के मैच में 80 ओवर के बाद फील्डिंग टीम का कप्तान नई गेंद मांग सकता है।

इसका यह मतलब नहीं है कि 80 ओवर के बाद पुरानी गेंद अपने आप खेलने लायक नहीं रहती। कई बार टीम पुरानी गेंद से खेलना जारी रख सकती है।

स्रोत: एमसीसी नियम 4

सफेद गेंद

सफेद गेंद सीमित ओवर के क्रिकेट में इस्तेमाल होती है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों में आमतौर पर दो नई गेंदें इस्तेमाल होती हैं—हर छोर से एक गेंद।

इस कारण दोनों गेंदों का इस्तेमाल पारी के अलग-अलग ओवरों में होता है। अलग-अलग प्रतियोगिताओं के नियम बदल सकते हैं।

स्रोत: आईसीसी मैच नियम

गुलाबी गेंद

गुलाबी गेंद दिन-रात के लंबे मैचों के लिए बनाई जाती है। इसकी उम्र बनाने वाली कंपनी, चमकदार परत, मैदान, रोशनी, मौसम और मैच में इस्तेमाल पर निर्भर करती है।

इसलिए हर गुलाबी गेंद के लिए ओवरों की एक तय संख्या नहीं बताई जा सकती।

खेल के दौरान गेंद की हालत कैसे बदलती है?
दौरआम बदलाव
नई गेंदज्यादा कड़ापन, साफ चमक और उभरी हुई सीम
कुछ समय खेली गई गेंदचमक कम हो सकती है और एक तरफ की सतह खुरदरी हो सकती है
पुरानी गेंदगेंद नरम हो सकती है, सामान्य स्विंग कम हो सकती है और सही परिस्थितियों में रिवर्स स्विंग मिल सकती है
खेलने की जगह गेंद पर कैसे असर डालती है?
मैदान की स्थितिगेंद पर असर
सूखी और खुरदरी जगहगेंद पर जल्दी खरोंच और खुरदरापन
मुलायम घास वाली आउटफील्डगेंद की सतह धीरे घिसती है
गीली या नमी वाली स्थितिलेदर नमी लेकर नरम हो सकता है
कड़ी और तेज पिचगेंद और सीम पर ज्यादा चोट पड़ सकती है

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और यूएई

इन देशों के कई मैदानों में सूखी पिच, खुरदरी अभ्यास वाली जगह और गर्म मौसम मिल सकता है।

इससे:

लेदर पर जल्दी खरोंच आ सकती है
गेंद की सतह जल्दी खुरदरी हो सकती है
चमक जल्दी कम हो सकती है
सही परिस्थितियों में रिवर्स स्विंग जल्दी मिल सकती है

अच्छी घास वाले मैदान या ठंडे और गीले मौसम में गेंद धीरे भी घिस सकती है।

यूके, न्यूजीलैंड और आयरलैंड

ठंडा मौसम, नमी और घास वाली आउटफील्ड कई मैदानों पर गेंद को जल्दी घिसने से बचा सकती है।

इससे:

लेदर धीरे खराब हो सकता है
चमक लंबे समय तक रह सकती है
सामान्य स्विंग में ज्यादा मदद मिल सकती है
गेंद की सतह धीरे खुरदरी हो सकती है

सूखे मौसम या ज्यादा इस्तेमाल वाली पिच पर हालात बदल सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका

इन देशों के कई मैदान कड़ी, तेज पिच और मजबूत आउटफील्ड के लिए जाने जाते हैं।

इससे:

गेंद पर ज्यादा जोर पड़ सकता है
सीम जल्दी चपटी हो सकती है
कड़ी आउटफील्ड पर गेंद ज्यादा घिस सकती है
आकार बना रहने तक उछाल एक जैसा रह सकता है

हर मैदान एक जैसा नहीं होता। मौसम, घास और गेंद की बनावट भी जरूरी होती है।

दो-पीस और चार-पीस क्रिकेट गेंद में अंतर
खासियतदो-पीस गेंदचार-पीस गेंद
बनावटलेदर के दो आकार वाले हिस्सेलेदर के चार आकार वाले हिस्से
आम इस्तेमालस्कूल, कोचिंग और नियमित अभ्यासअच्छा अभ्यास, क्लब और मैच
सीमसिलाई और गेंद की गुणवत्ता पर निर्भरअक्सर मैच जैसी उभरी सीम के साथ बनाई जाती है
प्रदर्शनबार-बार अभ्यास के लिए उपयोगीमैच जैसी तैयारी के लिए ज्यादा चुनी जाती है
कीमतआमतौर पर कमआमतौर पर ज्यादा
मजबूतीलेदर, कॉर्क, सिलाई और पिच पर निर्भरलेदर, कॉर्क, सिलाई और पिच पर निर्भर

क्लब क्रिकेट के लिए

SVB क्लब लेदर क्रिकेट गेंद

156 ग्राम की चार-पीस, हाथ से सिली लेदर क्रिकेट गेंद, जो क्लब अभ्यास, मैच और प्रतियोगिताओं के लिए लाल और सफेद रंग में उपलब्ध है।

SVB क्लब लेदर क्रिकेट बॉल

SVB क्लब लेदर क्रिकेट बॉल

₹599.00

क्लब मैचों, लीग मुकाबलों, क्रिकेट अकादमियों और उन्नत अभ्यास के लिए 156 ग्राम की चार टुकड़ों वाली, हाथ से सिली लेदर क्रिकेट गेंद।

गेंद देखें

क्रिकेट गेंद को लंबे समय तक कैसे सुरक्षित रखें?

अभ्यास के बाद ये आसान तरीके लेदर, सीम और गेंद के आकार को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।

Time: इस्तेमाल के बाद 5 मिनट2 items to prepare

Tools & Materials

  • साफ और मुलायम कपड़ा
  • सूखी और हवादार जगह
  1. 1

    गेंद को सूखा रखें

    इस्तेमाल के बाद गेंद पर लगी नमी को साफ कपड़े से पोंछें और उसे अपने आप सूखने दें। गेंद को तेज गर्मी के पास न रखें, क्योंकि इससे लेदर खराब हो सकता है।

  2. 2

    नियमों के अनुसार सतह की देखभाल करें

    मैच के दौरान गेंद को चमकाने और उसकी देखभाल करने के नियमों का पालन करें। लेदर को न खुरचें, सीम को न उठाएं और गेंद पर कोई बाहरी पदार्थ न लगाएं।

  3. 3

    गेंद को सही जगह रखें

    गेंद को ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर रखें। उसे लंबे समय तक गीले किट बैग या सीधी धूप में न छोड़ें।

  4. 4

    ठंडी जगह पर रखें

Result

इस्तेमाल के बीच लेदर, सीम और गेंद के आकार को बेहतर सुरक्षा मिलती है।

सामान्य स्विंग कम और रिवर्स स्विंग क्यों शुरू होती है?

सामान्य स्विंग पर सीम की दिशा, गेंद की सतह, गेंदबाजी की रफ्तार और गेंद के चारों ओर बहने वाली हवा का असर पड़ता है।

गेंद पुरानी होने पर उसकी एक तरफ की सतह ज्यादा चिकनी और दूसरी तरफ ज्यादा खुरदरी हो सकती है। सही परिस्थितियों और जरूरी रफ्तार में यह अंतर रिवर्स स्विंग में मदद कर सकता है।

रिवर्स स्विंग ओवरों की किसी तय संख्या के बाद अपने आप शुरू नहीं होती।

अलग-अलग क्रिकेट प्रारूपों में गेंद का इस्तेमाल

टेस्ट: गेंद चमक, घिसाव, सामान्य स्विंग और रिवर्स स्विंग के लंबे दौर से गुजर सकती है। 80 ओवर के बाद नई गेंद मांगी जा सकती है।

वनडे: मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों में आमतौर पर दो नई गेंदें इस्तेमाल होती हैं—हर छोर से एक। प्रतियोगिता के अनुसार नियम बदल सकते हैं।

टी20: आमतौर पर 20 ओवर की पारी के लिए एक गेंद इस्तेमाल होती है। गेंद खोने या खेलने लायक न रहने पर उसे बदला जा सकता है।

FAQ

क्रिकेट गेंद की उम्र से जुड़े आम प्रश्न

Question 1

एक अच्छी क्रिकेट गेंद कितने ओवर तक चलनी चाहिए?

इसकी कोई तय संख्या नहीं है। गेंद की उम्र उसकी बनावट, पिच, मौसम, देखभाल और इस्तेमाल पर निर्भर करती है।

Question 2

सफेद गेंद जल्दी घिसी हुई क्यों दिखाई देती है?

बार-बार चोट लगने और खुरदरी जगह पर चलने से उसकी बाहरी चमक जल्दी कम हो सकती है। घिसने की रफ्तार गेंद और मैदान की स्थिति पर निर्भर करती है, केवल उसके रंग पर नहीं।

Question 3

क्या चार-पीस गेंद हमेशा बेहतर होती है?

हमेशा नहीं। चार-पीस गेंद मैच जैसे अभ्यास के लिए ज्यादा चुनी जाती है, जबकि दो-पीस गेंद स्कूल, कोचिंग और नियमित नेट के लिए कम कीमत में अच्छा विकल्प हो सकती है।

Question 4

क्या दो-पीस गेंद मैच में इस्तेमाल की जा सकती है?

हां, अगर प्रतियोगिता के नियम इसकी अनुमति देते हैं और गेंद जरूरी माप को पूरा करती है। ऊंचे स्तर के मैचों में आमतौर पर चार-पीस गेंद चुनी जाती है।

Question 5

क्या सही देखभाल से क्रिकेट गेंद ज्यादा समय तक चल सकती है?

गेंद को ठीक से सुखाने, सही जगह रखने और नियमों के अनुसार उसकी सतह की देखभाल करने से उसे सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन इससे उम्र कितनी बढ़ेगी, इसकी तय गारंटी नहीं दी जा सकती।

मुख्य बातें

  • 1गेंद की उम्र उसकी बनावट, पिच, मौसम और इस्तेमाल पर निर्भर करती है।
  • 2मैच के नियम गेंद की असली उम्र की गारंटी नहीं देते।
  • 3दो-पीस और चार-पीस गेंदें अलग जरूरतों के लिए बनाई जाती हैं।
  • 4गेंद को सही तरीके से सुखाने और रखने से उसे सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
  • 5गेंद की गुणवत्ता उसकी पूरी बनावट देखकर तय करनी चाहिए।

गेंद कितने ओवर चलेगी, इसका केवल अंदाजा लगाया जा सकता है। अपने खेल, पिच, गेंद की बनावट और जरूरत के अनुसार सही गेंद चुनें।

अलग-अलग विकल्प देखें

हर जरूरत के लिए लेदर क्रिकेट गेंदें

बनावट, वजन, रंग, इस्तेमाल और खेलने के स्तर के अनुसार क्रिकेट गेंदों की तुलना करें और अपने लिए सही गेंद चुनें।

सही गेंद चुनें

अपने खेल के अनुसार गेंद चुनें

लेदर क्रिकेट गेंदों की बनावट, वजन, सीम और इस्तेमाल की तुलना करके सही विकल्प चुनें।

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क्रिकेट गेंदलेदर क्रिकेट गेंदगेंद की मजबूतीक्रिकेट गेंद की देखभाल