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गाइड्स

लेदर क्रिकेट गेंद: प्रकार, वजन, स्विंग और खरीदने की जानकारी

जानिए लेदर क्रिकेट गेंद कैसे बनती है, लाल, सफेद और गुलाबी गेंदों में क्या अंतर है और वजन, सीम, लेदर, पिच व बनावट उसके खेल पर कैसे असर डालते हैं।

26 November 2025Updated 1 August 202612 min readBy Prashant
Red, white and pink leather cricket balls arranged on a turf cricket pitch.
In this article23 sections

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लेदर क्रिकेट गेंद क्या होती है?

लेदर क्रिकेट गेंद में कॉर्क से बना अंदरूनी हिस्सा होता है, जिस पर धागा कसकर लपेटा जाता है और बाहर लेदर के टुकड़े सिले जाते हैं। इसका अंदरूनी हिस्सा, लेदर, सीम, सिलाई और ऊपरी परत मिलकर पकड़, स्विंग, उछाल और मजबूती पर असर डालते हैं।

Key facts

  • कॉर्क, धागे की लपेट और लेदर के कवर से बनाई जाती है
  • आम तौर पर दो-पीस और चार-पीस बनावट में मिलती है
  • पुरुष क्रिकेट की नई गेंद का वजन 155.9–163 ग्राम होना चाहिए
  • गेंद का खेल उसकी बनावट, सीम, लेदर और परिस्थितियों पर निर्भर करता है

लेदर क्रिकेट गेंद कई परतों को मिलाकर बनाई जाती है। कॉर्क से बना अंदरूनी हिस्सा गेंद को वजन और उछाल देता है। उसके चारों ओर कसकर लपेटा गया धागा गेंद को गोलाई और मजबूती देता है। बाहर सिले हुए लेदर के टुकड़े गेंद का कवर और उभरी हुई सीम बनाते हैं।

अच्छी क्रिकेट गेंदों को सही आकार देने में मशीनों की मदद ली जा सकती है, जबकि सीम की सिलाई कुशल कारीगरों द्वारा हाथ से की जाती है। गेंद का खेल अंदरूनी हिस्से के संतुलन, धागे की लपेट, लेदर की मोटाई, सीम की बनावट और ऊपरी परत की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

अलग-अलग खिलाड़ी वर्ग, मैच प्रारूप, पिच और अभ्यास की जरूरत के लिए अलग रंग, वजन और बनावट वाली लेदर गेंदें बनाई जाती हैं।

क्रिकेट गेंद देखने में साधारण लग सकती है, लेकिन उसकी बनावट में छोटे अंतर भी उसके खेल को काफी बदल सकते हैं।

लेदर की गुणवत्ता, सीम का आकार, सिलाई, अंदरूनी हिस्से का संतुलन और ऊपरी परत गेंद की पकड़, स्विंग, सीम से होने वाली हरकत, उछाल, गोलाई और मजबूती पर असर डालते हैं।

इस गाइड में इन सभी बातों को आसान तरीके से समझाया गया है, ताकि खिलाड़ी, माता-पिता, कोच, स्कूल और क्लब अपनी जरूरत के अनुसार सही लेदर क्रिकेट गेंद चुन सकें।

लेदर क्रिकेट गेंदों के प्रकार

लेदर क्रिकेट गेंदें आम तौर पर लाल, सफेद और गुलाबी रंग में मिलती हैं। गेंद का रंग मुख्य रूप से अलग-अलग रोशनी में साफ दिखाई देने और मैच के प्रारूप से जुड़ा होता है, लेकिन इनके बीच केवल रंग का अंतर नहीं होता।

रंगाई, चमकदार परत, लेदर और बनाने का तरीका भी इस बात पर असर डाल सकते हैं कि गेंद की चमक कितने समय तक रहती है और घिसने के बाद वह कैसे खेलती है।

लाल, सफेद और गुलाबी क्रिकेट गेंद की तुलना
विशेषतालाल गेंदसफेद गेंदगुलाबी गेंद
आम इस्तेमालदिन के टेस्ट और लाल गेंद वाला क्रिकेटवनडे और टी20दिन-रात के टेस्ट
कब साफ दिखती हैदिन मेंतेज रोशनी मेंशाम और रात में
ऊपरी परतरंगा हुआ लेदर और पॉलिशआम तौर पर सुरक्षात्मक चमकदार परतआम तौर पर अतिरिक्त चमकदार परत
घिसनाआम तौर पर लंबे समय तक सही रहती हैचमक जल्दी कम हो सकती हैचमकदार परत और परिस्थितियों पर निर्भर
स्विंगसामान्य और रिवर्स स्विंग कर सकती हैशुरुआत में अच्छी स्विंग कर सकती हैशाम के समय ज्यादा हरकत कर सकती है

लेदर क्रिकेट गेंद कैसे बनाई जाती है?

लेदर क्रिकेट गेंद बनाने के लिए सबसे पहले कॉर्क से अंदरूनी हिस्सा तैयार किया जाता है। इसके चारों ओर धागा कसकर लपेटा जाता है और फिर उसे सही आकार दिया जाता है।

इसके बाद तैयार किए गए लेदर के टुकड़ों को गेंद के चारों ओर लगाया और सिला जाता है। इसी सिलाई से गेंद की उभरी हुई सीम बनती है। अंत में गेंद को सही आकार दिया जाता है, उसकी ऊपरी परत तैयार की जाती है और वजन, गोलाई व संतुलन की जांच होती है।

मशीनें गेंद को दबाने, आकार देने और जांचने में मदद कर सकती हैं, लेकिन अच्छी लेदर गेंदों की सीम की सिलाई में आज भी कुशल कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

SVB Sports में गेंद बनाते समय अलग-अलग चरणों पर उसकी बनावट की जांच की जाती है, क्योंकि अंदरूनी हिस्सा, धागे की लपेट, लेदर, सिलाई और ऊपरी परत—सभी अंतिम वजन और खेल पर असर डालते हैं।

अच्छी गेंद गोल, संतुलित और बराबर सीम वाली होनी चाहिए। हाथ की सिलाई में कारीगर का कौशल जरूरी है, क्योंकि सिलाई का असमान खिंचाव गेंद की सीम और गोलाई को प्रभावित कर सकता है।

क्रिकेट गेंद की बनावट
हिस्साकाम
कॉर्क से बना अंदरूनी हिस्सावजन, मजबूती और उछाल देता है
धागे की लपेटगोलाई, कसाव और संतुलन बनाने में मदद करती है
लेदर का कवरपकड़ देता है और अंदरूनी हिस्से को बचाता है
उभरी हुई सीमपकड़ और सीम से होने वाली हरकत में मदद करती है
सिलाईलेदर के टुकड़ों को जोड़ती और गोलाई बनाए रखने में मदद करती है
ऊपरी परतलेदर को बचाती है और चमक व घिसने पर असर डालती है

क्रिकेट गेंद का वजन और आकार

क्रिकेट के नियम किसी एक वजन के बजाय गेंद के वजन और गोलाई की तय सीमा बताते हैं।

इसीलिए कंपनियां गेंदों पर आम तौर पर 156 ग्राम, 142 ग्राम या 135 ग्राम लिखती हैं, जबकि हर खिलाड़ी वर्ग के लिए नियमों में वजन की पूरी सीमा दी गई है।

क्रिकेट गेंद के तय वजन और गोलाई
खिलाड़ी वर्गनई गेंद का वजनगेंद की गोलाई
पुरुष155.9–163 ग्राम22.4–22.9 सेमी
महिला140–151 ग्राम21.0–22.5 सेमी
अंडर-13133–144 ग्राम20.5–22.0 सेमी

गेंद की मजबूती और खेलने की उम्र

लेदर क्रिकेट गेंद कितने समय तक सही रहेगी, इसका कोई एक तय जवाब नहीं है।

उसकी खेलने की उम्र गेंद की बनावट, लेदर, सीम, पिच, मौसम, देखभाल और इस्तेमाल पर निर्भर करती है। मैच के लिए पुरानी हो चुकी गेंद कुछ अभ्यासों के लिए फिर भी इस्तेमाल की जा सकती है।

क्रिकेट गेंद की मजबूती पर क्या असर डालता है?
कारणगेंद पर असर
खुरदरी पिचलेदर और सीम को जल्दी घिसती है
कड़ा मैदान या कंक्रीट का किनारालेदर को काट या नुकसान पहुंचा सकता है
लेदर की गुणवत्ताअच्छा लेदर आम तौर पर बराबर तरीके से घिसता है
सीम और सिलाईमजबूत बनावट गेंद की गोलाई बनाए रखने में मदद करती है
नमीलेदर को नरम करके गोलाई पर असर डाल सकती है
देखभालसही तरीके से सुखाने और रखने से नुकसान कम होता है
खेलने का स्तरतेज और बार-बार लगने वाले झटकों से गेंद जल्दी घिस सकती है

स्विंग, सीम और गेंद का खेल

क्रिकेट गेंद की हरकत उसकी हालत, सीम की दिशा, गेंद छोड़ने के तरीके, गेंदबाजी की रफ्तार और हवा के बहाव से बनती है।

उभरी हुई सीम गेंदबाज को बेहतर पकड़ देती है और पिच पर गिरने के बाद गेंद को हरकत दिलाने में मदद कर सकती है। हवा में स्विंग इस बात पर भी निर्भर करती है कि सीम कितनी स्थिर रहती है और गेंद की दोनों तरफ से हवा कैसे गुजरती है।

पिच, नमी, हवा और गेंद का घिसना भी उसके खेल को बदल सकता है।

गेंद की एक तरफ चमक और दूसरी तरफ खुरदरापन पुरानी गेंद की स्विंग में मदद कर सकता है, लेकिन यही अकेला कारण नहीं है। नई गेंद की सीम, ऊपरी परत, रफ्तार और उसे छोड़ने का तरीका भी स्विंग पर असर डालते हैं।

क्रिकेट गेंद के खेल पर क्या असर डालता है?
कारणमुख्य असर
सीम की दिशाहवा के बहाव और सीम से होने वाली हरकत पर असर डालती है
गेंद की सतहसामान्य और रिवर्स स्विंग पर असर डालती है
कलाई और गेंद छोड़ने का तरीकासीम को स्थिर रखने और दिशा देने में मदद करता है
गेंदबाजी की रफ्तारगेंद के चारों ओर हवा के बहाव को बदलती है
अंदरूनी हिस्सा और बनावटउछाल, मजबूती और गोलाई पर असर डालते हैं
पिच और मौसमहरकत, उछाल और घिसने पर असर डालते हैं

दो-पीस और चार-पीस क्रिकेट गेंद में अंतर

दो-पीस गेंद का बाहरी कवर लेदर के दो आकार दिए गए टुकड़ों से बनता है। इसका इस्तेमाल आम तौर पर कम कीमत वाले अभ्यास, स्कूल क्रिकेट और नियमित ट्रेनिंग के लिए होता है।

चार-पीस गेंद में लेदर के चार टुकड़े होते हैं। इसे आम तौर पर बेहतर स्तर के अभ्यास, क्लब क्रिकेट और मैच के लिए चुना जाता है।

लेकिन केवल लेदर के टुकड़ों की संख्या से गेंद की गुणवत्ता तय नहीं होती। लेदर, अंदरूनी हिस्सा, धागे की लपेट, सिलाई और ऊपरी परत भी देखनी चाहिए।

दो-पीस और चार-पीस बनावट की तुलना
विशेषतादो-पीस गेंदचार-पीस गेंद
लेदर की बनावटलेदर के दो आकार दिए गए टुकड़ेलेदर के चार टुकड़े
आम इस्तेमालअभ्यास, स्कूल और नियमित ट्रेनिंगबेहतर अभ्यास, क्लब और मैच
कीमतआम तौर पर कमआम तौर पर ज्यादा
कब चुनेंजब नियमित इस्तेमाल और कम कीमत जरूरी होजब मैच जैसी बनावट चाहिए

सही लेदर क्रिकेट गेंद कैसे चुनें?

सबसे महंगी या सबसे भारी गेंद हर खिलाड़ी के लिए सही नहीं होती। गेंद का चुनाव खिलाड़ी वर्ग, पिच, अभ्यास की जरूरत और प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार होना चाहिए।

खरीदने से पहले देखें कि गेंद का इस्तेमाल कभी-कभी होने वाले अभ्यास, नियमित नेट, क्लब ट्रेनिंग या मैच के लिए किया जाएगा।

सही गेंद चुनने का सही तरीका
क्या देखें?सुझाव
इस्तेमालअभ्यास, नियमित नेट, क्लब या मैच के अनुसार चुनें
खिलाड़ी वर्गजरूरी वजन और आकार की पुष्टि करें
पिचखुरदरी पिच के लिए मजबूत अभ्यास गेंद चुनें
बनावटजरूरत के अनुसार दो-पीस या चार-पीस गेंद चुनें
सीमसीम बराबर, मजबूत और सही आकार में होनी चाहिए
गोलाई और संतुलनगेंद गोल हो और हाथ में एक तरफ भारी महसूस न हो
रंगमैच के प्रारूप और रोशनी के अनुसार चुनें
प्रतियोगिता के नियममैच से पहले जरूरी नियमों की पुष्टि करें

क्लब और मैच अभ्यास

SVB क्लब लेदर क्रिकेट गेंद

156 ग्राम की चार-पीस, हाथ से सिली लेदर क्रिकेट गेंद, जिसे क्लब क्रिकेट, सीजन और बेहतर स्तर के अभ्यास के लिए बनाया गया है।

SVB क्लब लेदर क्रिकेट बॉल

SVB क्लब लेदर क्रिकेट बॉल

₹599.00

क्लब मैचों, लीग मुकाबलों, क्रिकेट अकादमियों और उन्नत अभ्यास के लिए 156 ग्राम की चार टुकड़ों वाली, हाथ से सिली लेदर क्रिकेट गेंद।

SVB क्लब गेंद देखें

क्रिकेट गेंद की देखभाल और उसे रखने का तरीका

सही देखभाल गेंद को सामान्य रूप से घिसने से नहीं रोक सकती, लेकिन बेवजह होने वाले नुकसान को कम कर सकती है।

इस्तेमाल के बाद साफ और सूखे कपड़े से मिट्टी हटाएं। गेंद गीली हो तो उसे सामान्य तापमान पर अपने आप सूखने दें। उसे सीधी धूप से दूर, सूखी और हवादार जगह पर रखें।

गेंद पर तेल, रसायन या बनावटी पॉलिश न लगाएं, जब तक कंपनी ने ऐसा करने की सलाह न दी हो। बुरी तरह फटी, बिगड़े आकार वाली या असुरक्षित गेंद का इस्तेमाल बंद कर दें।

भारत में लेदर क्रिकेट गेंद की कीमत

लेदर क्रिकेट गेंद की कीमत उसके लेदर, अंदरूनी हिस्से, बनावट, सिलाई, ऊपरी परत, कंपनी, पैक में गेंदों की संख्या और इस्तेमाल के अनुसार बदलती है।

अभ्यास की दो-पीस गेंदें आम तौर पर कम कीमत में मिलती हैं, जबकि चार-पीस क्लब और मैच गेंदों की कीमत ज्यादा हो सकती है।

कीमतें समय के साथ बदल सकती हैं। इसलिए केवल कीमत देखने के बजाय गेंद का वजन, बनावट, लेदर, सीम और इस्तेमाल भी देखें।

Caution

खरीदने से पहले जांचें

ढीली या असमान सिलाई, खराब सीम, बिगड़ी गोलाई, लेदर पर साफ नुकसान या असमान संतुलन वाली गेंद खरीदने से बचें। केवल रंग और ऊपरी चमक से गेंद की गुणवत्ता तय नहीं होती।

मैच के लिए गेंद खरीदते समय उसके वजन, आकार, रंग और बनावट से जुड़े प्रतियोगिता के नियम जरूर जांचें।

क्रिकेट गेंद की गुणवत्ता कैसे जांचें?

अच्छी लेदर क्रिकेट गेंद को केवल एक दिखाई देने वाली विशेषता से नहीं, बल्कि उसकी पूरी बनावट से जांचना चाहिए।

देखें कि गेंद गोल और बराबर संतुलित है या नहीं। लेदर पर नुकसान की जांच करें और सीम व सिलाई को ध्यान से देखें। सीम बराबर, मजबूत और सही दिशा में होनी चाहिए।

गेंद की बनावट उसके इस्तेमाल के अनुसार होनी चाहिए। कम कीमत वाली अभ्यास गेंद और मैच गेंद की जरूरत अलग होती है, इसलिए उनकी तुलना केवल कीमत के आधार पर नहीं करनी चाहिए।

सभी विकल्प देखें

अभ्यास और मैच के लिए लेदर क्रिकेट गेंदें

वजन, रंग, बनावट और इस्तेमाल के अनुसार क्रिकेट गेंदों की तुलना करें और अपने अभ्यास या मैच के लिए सही विकल्प चुनें।

FAQ

लेदर क्रिकेट गेंद से जुड़े आम प्रश्न

Question 1

लेदर क्रिकेट गेंद के अंदर क्या होता है?

लेदर क्रिकेट गेंद के अंदर आम तौर पर कॉर्क से बना हिस्सा होता है, जिस पर धागा कसकर लपेटा जाता है। बाहर सिले हुए लेदर के टुकड़े गेंद का कवर और उभरी हुई सीम बनाते हैं। अलग-अलग गेंदों की बनावट बदल सकती है।

Question 2

क्रिकेट गेंद का सही वजन कितना होता है?

एमसीसी नियम 4 के अनुसार, नई गेंद का वजन पुरुष क्रिकेट में 155.9–163 ग्राम, महिला क्रिकेट में 140–151 ग्राम और अंडर-13 क्रिकेट में 133–144 ग्राम होना चाहिए।

Question 3

दो-पीस और चार-पीस गेंद में क्या अंतर है?

दो-पीस गेंद में लेदर के दो टुकड़े होते हैं और इसे आम तौर पर कम कीमत वाले नियमित अभ्यास के लिए चुना जाता है। चार-पीस गेंद में लेदर के चार टुकड़े होते हैं और इसे बेहतर अभ्यास, क्लब क्रिकेट और मैच के लिए ज्यादा पसंद किया जाता है।

Question 4

अभ्यास के लिए कौन-सी लेदर क्रिकेट गेंद सही है?

सही अभ्यास गेंद खिलाड़ी के वर्ग, पिच और अभ्यास के स्तर पर निर्भर करती है। दो-पीस गेंद नियमित और कम कीमत वाले अभ्यास के लिए उपयोगी हो सकती है, जबकि चार-पीस गेंद बेहतर स्तर के अभ्यास में मैच जैसा अनुभव देती है।

Question 5

लेदर क्रिकेट गेंद कितने समय तक चलती है?

इसका कोई एक तय जवाब नहीं है। गेंद की खेलने की उम्र उसकी बनावट, लेदर, सीम, पिच, मौसम, देखभाल और इस्तेमाल पर निर्भर करती है। मैच के लिए पुरानी हो चुकी गेंद अभ्यास में काम आ सकती है।

Question 6

क्रिकेट गेंद स्विंग क्यों करती है?

गेंद की सीम, सतह, रफ्तार, हवा का बहाव और उसे छोड़ने का तरीका मिलकर स्विंग पैदा करते हैं। मौसम और गेंद का घिसना भी उसकी हरकत पर असर डाल सकता है।

Question 7

लाल, सफेद और गुलाबी गेंद में क्या अंतर है?

लाल गेंद मुख्य रूप से दिन के टेस्ट, सफेद गेंद वनडे और टी20, जबकि गुलाबी गेंद दिन-रात के टेस्ट में इस्तेमाल होती है। इनके रंग, ऊपरी परत, अलग-अलग रोशनी में साफ दिखाई देने और इस्तेमाल में अंतर होता है।

Question 8

लेदर क्रिकेट गेंद को कैसे रखना चाहिए?

इस्तेमाल के बाद मिट्टी हटाएं और गीली गेंद को सामान्य तापमान पर सूखने दें। उसे सीधी धूप से दूर, सूखी और हवादार जगह पर रखें। तेल या बनावटी पदार्थ न लगाएं।

Question 9

लेदर क्रिकेट गेंद खरीदने से पहले क्या जांचना चाहिए?

गेंद का वजन, खिलाड़ी वर्ग, इस्तेमाल, बनावट, लेदर, सीम, सिलाई, गोलाई और संतुलन जांचें। मैच के लिए खरीदते समय प्रतियोगिता के नियम भी जरूर देखें।

Question 10

क्या महंगी क्रिकेट गेंद हमेशा बेहतर होती है?

जरूरी नहीं। महंगी गेंद में बेहतर सामान या बनावट हो सकती है, लेकिन सही गेंद वही है जो खिलाड़ी, पिच, अभ्यास और मैच की जरूरत के अनुसार हो।

मुख्य बातें

  • 1लेदर क्रिकेट गेंदें रंग, बनावट, वजन और इस्तेमाल के अनुसार अलग होती हैं।
  • 2लेदर, अंदरूनी हिस्सा, धागे की लपेट, सीम और सिलाई गेंद के खेल पर असर डालते हैं।
  • 3गेंद का वजन और आकार खिलाड़ी वर्ग व प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार होना चाहिए।
  • 4स्विंग और मजबूती गेंद की बनावट और खेलने की परिस्थितियों, दोनों पर निर्भर करती हैं।
  • 5सही गेंद पिच, इस्तेमाल और खिलाड़ी के स्तर के अनुसार चुननी चाहिए।

इन बातों को समझने से आप केवल कीमत, रंग या कंपनी का नाम देखकर गेंद चुनने के बजाय सही तरीके से अलग-अलग गेंदों की तुलना कर सकते हैं।

अपनी गेंद चुनें

बेहतर चुनें, बेहतर खेलें

अपने अभ्यास, पिच और खेलने के स्तर के अनुसार सही लेदर क्रिकेट गेंद चुनें।

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